क्या मोदी का विरोध हिन्दू धर्म का विरोध है?

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Do you think that Modi represents Hindu religion?

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जब इस्लाम सत्ता की लड़ाई बना तो सबसे पहला काम सत्ताधारियों द्वारा ये किया गया कि मुसलमानो को मुसलमान का दुश्मन बनाया गया.. कौन "ज़्यादा" मुसलमान है और कौन "कम" इस बात को लेकर मुसलमान आपस मे ख़ून ख़राबा करने लगे.. अलग अलग गुट बने जो आपस मे एक दूसरे को "क़ाफ़िर" कहने लगे और एक दूसरे को मारने लगे.. ये सब उनके द्वारा किया जा रहा था जो इस्लाम द्वारा अपने गुट पर नियंत्रण रखना चाह रहे थे.. इस्लाम के चार "स्कूल ऑफ थॉट्स" के लोग एक दूसरे पर और एक दूसरे के इमामों पर इल्ज़ाम लगते, मारते और ज़लील करते थे.. और उसकी वजह ही यही थी कि इस इमाम ले लोग "कम" मुसलमान हैं और हम "ज़्यादा".. वो कुफ़्र करते हैं और हम सच्ची राह पर हैं.. इसी "सही मुसलमान" और "ग़लत मुसलमान" की धारणा ने शिया और सुन्नी को लड़ाया

आज तक जितनी भी लड़ाई आप इस्लामिक दुनिया मे देखते हैं वो सब इसी पर आधारित हैं कि कौन "कम मुसलमान है" और कौन "ज़्यादा मुसलमान" है.. सारे ख़ून ख़राबे की जड़ ही यही है.. तालिबान समेत सारे संगठन जो पाकिस्तान से लेकर सीरिया में बम फोड़ते हैं वो इसी लिए फोड़ते हैं कि जो मुसलमान "सही रास्ते" पर नहीं हैं और जो उन्हें अपने धर्म से "ख़त्म" किया जा सके

ये "सही मुसलमान" और "ग़लत मुसलमान" वाला बीज उन लोगों द्वारा धीरे धीरे बोया गया जिनकें लिए इस्लाम सत्ता में बने रहने का हथियार बन चुका था.. बहुत धीरे धीरे मगर उन्होंने आज हर मुसलमान को एक दूसरे का दुश्मन बना दिया और मुसलमानों के आपस की ये नफ़रत अब मुसलमानो के अस्तित्व के साथ ही समाप्त होगी.. उस पहले नहीं

अब देखिए और समझिये कि कैसे इस्लाम के इस खेल को भारत मे जस का तस कॉपी किया जा रहा है.. कैसे सत्ता को धर्म बात दिया गया है और कैसे आप सत्ताधारियों को अपने धर्म का रक्षक समझ रहे हैं

आज से पहले इस देश मे कभी भी किसी राजनैतिक पार्टी या उसके नेताओं के प्रति इस तरह से नफ़रत नहीं फैलाई गई कि एक पार्टी को छोड़कर बाक़ी सारी पार्टी के नेता और कार्यकर्ता आपको देशद्रोही और धर्मद्रोही दिखने लगें.. कैसे हिंदुओं को स्वयं हिंदुओं का दुश्मन बना दिया गया धीरे धीरे ये आप जान ही नहीं पाए और अभी भी नहीं समझ पा रहे हैं.. नेहरू से लेकर महात्मा गांधी और राहुल गांधी से लेकर अखिलेश यादव तक हर कोई "कम हिन्दू" या "सही हिन्दू" नहीं है और अब इस बात को विशाल जनमानस ने स्वीकार कर लिया है.. हमारे समय तक नेहरू "चाचा नेहरू" थे और अब ऐसा माहौल रचा गया कि हिन्दू "स्वयं" उन्हें "अपना" कहने में शर्माता है.. नेहरु का किसी दूसरी औरत के साथ रिश्ता ऐसे दिखाया जाता है जैसे इस्लाम में इसे "ज़िना" समझा जाता है इसके लिए सज़ाए मौत होती है.. गांधी को औरतों के साथ घिरा हुवा ऐसे दिखाया जाता है कि जैसे इस्लाम के सिपाही उनके लिए सज़ाए मौत की मांग कर रहे हों.. और ये सब दिखा कर नेहरु को आपकी नज़रों में गिराया जाता है और "हिन्दू" को "हिन्दू" का दुश्मन बनाया जाता है.. नेहरु का सिगरेट पीना आपको ऐसा नफरत भरा काम बता दिया गया है कि जिसके विरोध में "ख़ूनी" और "क़ातिलों" को गर्व से आप अपना और अपने धर्म का रक्षक स्वीकार कर लेते हैं.. सोचिये थोड़ा इस पर.. सिगरेट पीना, किसी दूसरी स्त्री से प्रेम सम्बन्ध होना किसी को क़त्ल करने से अधिक बड़ा पाप है? नहीं है न? मगर अब आप इसे मानते हैं.. आप मानते हैं कि नेहरु नीच था क्यूंकि वो सिगरेट पीता था और उसे "नवरात" में उपवास करना चाहिए था तब वो "सच्चा" हिन्दू होता.. यही सब आपको समझा दिया गया है.. अपने नेता के "उपवास", लंबा टीका, गले में भगवा गमछा होने को वो आपको ऐसा दिखाते हैं जैसे उसका उनका ये सब करना आपके धर्म की रक्षा कर रहा है

आज भारत मे ये हाल है कि सत्ता में शीर्ष पर बैठे नेता के बारे में आप अगर कुछ बोल दें तो बहुसंख्यक इसे अपने धर्म पर हुवा हमला मानते हैं.. और ये इस तरह से हो रहा है कि एक बार को आप राम और कृष्ण को कुछ बोल दें, अन्य किसी भी धार्मिक महापुरुष को बोल दें मगर मोदी को आपने अगर कुछ कह दिया तो एक तरह से सारा बहुसंख्यक आपको अपना दुश्मन मान लेता है.. ये सब समझाया गया है आपको और इसके लिए बरसों से पूरा माहौल बनाया गया है

अभी कल ही एक भाई ने मुझ से कहा कि "ताबिश भाई जो हिंदुओं से मुहब्बत करता है वो मोदी को कभी बुरा कह ही नहीं सकता"

मैं बहुत सोच में पड़ गया इस स्टेमेन्ट को सुनकर, क्यूंकि लगभग हर हिन्दू के मन मे इसे बिठा दिया गया है कि "मोदी मतलब हिन्दू धर्म"... और यहां के ही हिन्दू नहीं बल्कि विदेशों में बैठे और ऊंचे ऊंचे ओहदों पर बैठे,  बेहद पढ़े लिखे भी इसी बात को मानने लगे हैं कि अगर आपने मोदी की बुराई की तो इसका मतलब ये है कि आप के भीतर "जेहादी" छिपा है.. आप देश के टुकड़े करने का सोच रहे हैं.. आप हिंदुओं से नफ़रत करते हैं.. आप पाकिस्तान परस्त हैं.. आप अपनी सेना समेत देश के संविधान से नफ़रत करते हैं.. मतलब ये कि आप पूरा का पूरा "देशद्रोही" और "धर्मद्रोही" पैकेज हैं अगर आपने मोदी के ख़िलाफ़ कुछ भी कहा तो.. मोदी इस समय सारे हिंदुओं के एकमात्र रिप्रेजेन्टेटिव हैं

और समझिये इस बात को कि ऐसा नहीं है कि "मैं मुसलमान हूँ" और मैं मोदी के ख़िलाफ़ कुछ बोल देता हूँ तो मेरा मुसलमान होना इस बात के लिए परेशानी खड़ी कर रहा है.. और लोग ये समझते हैं कि मोदी हिन्दू हैं और मैं मुसलमान और इस बात को लेकर भावुक हो जाते हैं मोदी के लिए.. नहीं ये बात नहीं है.. बिल्कुल भी नहीं है.. क्यूंकि.. आप और मैं मुसलमान होकर राहुल गांधी की जितनी चाहें हंसी उड़ा सकते हैं, नेहरू की हंसी उड़ा सकते हैं, महात्मा गांधी को गाली दे सकते हैं, मायावती से लेकर अखिलेश को अपशब्द बोल सकते हैं और लगभग हर उस नेता को अपशब्द बोल सकते हैं जो भाजपा और संघ से न जुड़ा हो.. और ये सारे नेता हिन्दू हैं मगर बहुसंख्यक हिन्दू को इनका अपमान, अपना अपमान नहीं लगता है क्यूंकि उसे बहुत गहराई से ये समझा दिया गया है कि भाजपा और संघ के अलावा लगभग हर नेता "कम हिन्दू" है और असल में वो "हिन्दू" है ही नहीं.. और अब जो हिन्दू नहीं है उसे मुसलमान समेत कोई भी कुछ कह सकता है

अब "असल हिन्दू" कौन है इसे सत्ता में बैठी पार्टी और उसके लोग निर्धारित कर रहे हैं.. और ध्यान दीजियेगा कि अगर यही अखिलेश यादव या राहुल गाँधी भाजपा या संघ में आ जाते हैं तो आप उनके "हिन्दू" होने पर कोई शक नहीं करेंगे और अगर राहुल गाँधी भाजपा में आ जाते हैं और उसके बाद मैं उनको गाली देता हूँ तो आपके हिसाब से वो तुरंत "हिन्दुवों" पर हमला हो जाएगा और आप मुझे मुसलमान, कम्युनिस्ट, सिकुलर कह कर कोसेंगे और बोलेंगे कि राहुल गाँधी हिन्दू हैं इसलिए मेरे भीतर का "जिहादी मुसलमान" उनके विरोध में उतर आया है

शातिर अपराधी इसे कैसे भुना रहे हैं वो आपको अभी दिख नहीं रहा है.. वो बलात्कार करते हैं.. फिर लंबा सा टीका लगा लेते हैं.. और भाजपा या संघ से कहीं न कहीं स्वयं को जुड़ा दिखा देते हैं तो आप समेत सारा देश उनके समर्थन में खडा हो जाता है और आपको उन बलात्कारियों पर हमला "हिन्दू समाज" पर हमला लगने लगता है और उन का विरोध "हिन्दू धर्म" का विरोध लगने लगता है 

सत्ताधारी आपको ये समझा लेने में कामयाब हो चुके हैं कि कौन "सच्चा हिन्दू" है और कौन "झूठा हिन्दू".. ये लोगों को बता ले गए हैं कि जो "राम का नहीं है" वो असल में हिन्दू नहीं है.. अब बाक़ी लाखों देवी देवताओं वाले अपने आप "छोटे और "तुच्छ" हिन्दू हो गए.. आपको हर हाल में "जय श्री राम" बोलना है भले आप बुद्ध को मान रहे हों या ब्रहाम्कुमारी विचारधारा से प्रभावित हों.. आपने इसे बहुत ख़ुश होकर स्वीकार तो कर लिया इस धुन में कि "मुसलमान" इसे नहीं बोलेगा तो हमारे अपने "उग्र लोग" उसे मारेंगे.. मगर आप ये नहीं समझ पाए कि आपके अपने घर में ही कितने हैं जो आज नहीं तो कल इस तरह बेवकूफ़ी में असहज महसूस करेंगे.. अभी तो मुसलमानों को जलाना और उनको चिढ़ाने के लिए आपने इस तरह की बेवकूफी को स्वीकार कर लिया मगर कल को जब आपको ये पता चलेगा कि मुसलमानों को इस से फ़र्क ही नहीं पड़ता है कि कि  "बच्चा बच्चा राम का है" या कृष्ण का है और फिर एक दिन आपका अपना बच्चा "लिंगायत" होना चाहता है या बुद्ध की शरण में जाना चाहेगा तो अचानक से वो देशद्रोही.. "झूठा हिन्दू".. "कम हिन्दू" हो जाएगा तो आने वाला समय उसके लिए कैसा होगा ये कल्पना की है आपने?

यही काम अरब में हुवा था.. इसे ध्यान से समझिएगा

बर्बर ख़लीफ़ा जिन्होंने सब से ज़्यादा खून ख़राबा किया, आज सारी दुनिया का मुसलमान उन्हें पूजता है और उन्हीं ख़लीफ़ाओं का धर्म वो मानता है और जिसका नतीजा ये है कि सारी इस्लामिक आइडियोलॉजी खून ख़राबे से भर गई है और उसे मुसलमान असल इस्लाम बताता है

इन खलीफाओं  ने सत्ता के लिए "रिद्दा लड़ाई" में सबसे ज़्यादा मुसलमानो को मारा.. ये लड़ाई पैग़म्बर के जाने के दो तीन महीनों के भीतर हुई और इस लड़ाई में अबुबकर, उमर और उनकी सेना ने "कम और ख़राब मुसलमानो"  का सफ़ाया किया.. इस लड़ाई के बाद हालात ये हो गए थे कि "क़ुरआन" को जिन हाफिजों ने मुहम्मद साहब के साथ याद कर रखा था वो लगभग सारे के सारे मार डाले गए और एक बार को ऐसे हालात लगने लगे थे कि शायद अब क़ुरआन को पूरा सुनाने वाले कोई बचा ही न हो.. पैगम्बर के जाने के कुछ ही दिनों के भीतर "सही मुसलमान" और "ग़लत मुसलमान" का फैसला खलीफाओं/उत्तराधिकारियों द्वारा किया जाने लगा.. और आज भी वही सब चल रहा है

खलीफ़ा उमर ने औरतों को "नक़ाब" ओढने के लिए बाध्य किया.. ख़लीफा उमर ने "पर-स्त्री" समागम पर सजाए मौत देना शुरू किया और हुक्म दिया कि जो दूसरी औरत के साथ सोये उसे पत्थर मार मार कर मार डाला जाए.. वो व्यक्ति नास्तिकों को जिंदा जला सकता है, दूसरे पंथ के किसी भी व्यक्ति को बिना किसी वजह के मार सकता है, दूसरे पंथ की स्त्री के साथ बलात्कार कर सकता है, उसे गुलाम बना सकता है.. मगर अपने धर्म की परस्त्री से वो समागम नहीं कर सकता है.. ये उनके लिए सबसे बड़ा गुनाह था जैसे आज आपके लिए नेहरु का सिगरेट पीना और गांधी का औरतों के साथ रहना सबसे बड़ा गुनाह है.. नेहरु ने गांधी को मार दिया होता तो शायद आप इस समय उनका सिगरेट पीना आपको बुरा नहीं लगता.. थोड़ा भी सोचते हैं आप कि किन क्षुद्र बातों को आपको समझाकर हिन्दू को हिन्दू का दुश्मन बनाया जा रहा है?

आपको पता है.. कि अब तक मैं जितने भी संघ के पढ़े लिखे लोगों से मिला हूँ उन सबके मुह से मैंने ख़लीफ़ा उमर की सिर्फ़ तारीफ़ ही सुनी है.. कोई भी संघ का व्यक्ति आपको कभी "ख़लीफ़ा उमर" को गाली देता नहीं मिलेगा और मन ही मन उन्हें एक आइडियल आदमी मानता मिलेगा.. क्यूंकि इनकी सारी आइडियोलॉजी इन्हीं खलीफाओं की कॉपी पेस्ट है.. ये आपके नए हिन्दू धर्म का निर्माण उन्हीं के नक़्शे क़दम पर कर रहे हैं

इस आर्टिकल को पढ़कर सुन्नी मुसलमान मुझे उतनी ही गाली देंगे जितना भाजपा और संघ के लोग देंगे.. क्यूंकि उनके लिए उनका ख़लीफ़ा ही इस्लाम है और भाजपा आरएसएस के लिए उनका नया गढ़ा हुवा ख़लीफ़ा हिन्दू धर्म है.. समझिये इसे और चेतिए

~ताबिश 



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