एक कहानी - पुच्चू

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Puchchu - Story by shubham tiwari

गिलहरी का बच्चा दो दिन से चिल्ला रहा था और अपने घोंसले से रोज़ नीचे गिर जाता था। मेरी मां रोज़ उसे उठाकर घोंसले में रख देती थीं क्योंकि अभी उसकी आंख भी नहीं खुली थी।

आज सुबह ये बच्चा फिर रो रहा था और अपनी चीं-चीं की महीन आवाज़ कर रहा था और नीचे गिरा गया तो मैंने उस गिलहरी के बच्चे को देखा और मां से कहा इसे रूई में पालते हैं और बिस्तर बना देते हैं इसका। और एक प्लास्टिक का चौकोर छोटा सा डिब्बा लिया और उसमें उसका बिस्तर बना दिया। क्योंकि ये हर रोज़ गिर जाता था और घोंसला दरवाज़े के पास था। इसके बार-बार नीचे गिरने से मुझे डर था कि ये कहीं मर न जाये तो इसलिये घोंसलें में वापस नहीं रखा और उसके लिये रूई का बिस्तर बना दिया और दूध भी तैयार कर दिया।

मेरी मां ने कहा कि इसकी मां आती नहीं है,छोड़कर पता नहीं कहां चली गयी है। ये रोता रहता है और अभी इसकी आंख भी नहीं खुली है। मां ने सोचा इसका घोंसला हटा देते हैं जब मां आती नहीं तो घोंसलें का क्या करना। जब घोंसला हटाया तो घोंसले के अन्दर उसकी मां मरी हुयी थी। क्योंकि घोंसले के पास से ही बिजली का तार गया हुआ था। गिलहरी ने तार को घोंसले के अन्दर कर लिया था और तार को काटने की कोशिश की थी और करंट लगने के कारण गर गयी होगी क्योंकि बीच में लाइट कट गयी थी तो तार को जोड़ा गया था।

करंट लगने के कारण पुच्चु की मां मर गयी (मैंने इसे पुच्चु नाम दिया है)। और पुच्चु दो दिन तक मां की लाश के पास रोता रहा। पुच्चु की आंख तक नहीं खुली है और इतना बड़ा ग़म पैदा होते ही। आंखें खोलकर अपनी मां को देख भी न पाया। अपने पहले प्यार को खो दिया‌।

लेकिन मेरी मां ने पुच्चु को उसकी मां जितना ही प्यार देना शुरू किया। दिन पर दिन पुच्चु बड़ा हो रहा है। अब उसकी आंख भी खुली गयी हैं वो ख़ूब उछल-कूद करता है। पुच्चु को बड़ा करके उसे आज़ाद छोड़ देना है। हमें उसे अपने साथ ज़िन्दग़ी भर रोकने की कोई चाह नहीं है। हम उसे आज़ाद कर देंगे उसके बाद उसका जो मन होगा वो करेगा।


लेकिन ये क्या आज सुबह वो बिस्तर से उछल-कूद करने के लिये उठा नहीं। लगता है बहुत गहरी नींद सो गया एकदम हिल नहीं रहा वरना मां की आहट मिलते ही चिचियाने लगता था। हम सबने लाख उठाया लेकिन पुच्चु नहीं उठा बहुत गहरी नींद सो गया।


पुच्चु अपनी मां (गिलहरी) को भूल नहीं पाया इसलिये अपनी मां के पास ही चला गया। लेकिन पुच्चु तुम्हें पूरा घर याद करता है। वो दयाली जिसमें तुम दूध पीते थे । वो बिस्तर जिसमें तुम सोते थे। तुम्हें  हमारा साथ कुछ दिनों के लिये ही अच्छा लगा। तुम्हें नयी दुनिया मुबारक। 
 
बस एक शेर है पुच्चु तुम्हारे लिये।

ठीक है नहीं मरता कोई जुदाई में

ख़ुदा किसी को किसी से मगर जुदा न करे।
      

लेकिन पुच्चु तुम जुदाई में मर गये।


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