कैसे कट्टर सुन्नी/वहाबी इस्लामिक विचारधारा सीरिया को निगले जा रही है

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Syria Current Situation

Image Credit: FullDhamaal.com

अब सरिया में सुन्नी मुसलमान मारे जा रहे हैं.. और अब सारी दुनिया के सुन्नी मुसलमान परेशान हैं.. भारतीय मुसलमान भी दिन रात वहां की वीभत्स तस्वीरें पोस्ट कर रहे हैं जिनमे से ज़्यादातर फ़ेक हैं.. मगर फिर भी हालात तो वहां खराब हैं हीं मगर ऐसा लग रहा है जैसे हालत अब खराब हुवे हैं.. पहले सब सही था जब अन्य धर्मों और पंथों के लोग ISIS द्वारा मारे जा रहे थे

यही चलन देखने को मिलता है सुन्नी मुस्लिम समुदाय में.. ये आज से नहीं हमेशा से मैं देख रहा हूँ.. सद्दाम हुसैन जब कुर्दों का नरसंहार कर रहा था और शियाओं को मार रहा था सब एकदम चुप थे.. और जैसे ही सद्दाम हुसैन पर हमला हुवा बस विलाप शुरू हो गया.. हमारे मोहल्लों में नारे लगते थे उस समय सद्दाम हुसैन के समर्थन में.. यही हाल ISIS का है.. ISIS ने अपनी जड़ें मज़बूत की सीरिया में.. क्या उन्होंने ऐसे ही जड़ें मज़बूत कर ली बिना सुन्नियों के और लोकल लोगों के समर्थन के? कैसे वो इतने बड़े संगठन के रूप में उभर गए? कैसे उनका ख़लीफ़ा घोषित हो गया बिना वहां के लोगों के समर्थन के? यही हाल तालिबान का हुवा यही हाल अलक़ायदा का हुवा.. ये सब बिना मुसलमानों के सपोर्ट के कभी खड़े नहीं हो सकते थे और न हैं.. आप.. आप सुन्नी मुसलमानों के सपोर्ट से ISIS शिया और अन्य लोगों का नरसंहार कर रहा था

पंजाब में आतंकवाद ख़त्म किया गया तो वहां के तमाम बेगुनाह मारे गए.. कश्मीर में भी यही हो रहा है.. क्यूंकि वहीँ के पंजाबियों और मुसलमानों ने आतंकियों को पनाह दी थी और आतंकी इन्ही के बीच से निकले थे.. ऐसे ही सीरिया में हो रहा है.. बेगुनाह तो मारे ही जायेंगे अब.. जिहोने ख़लीफ़ा चुना था बगदादी को और जो ये सोच रहे थे कि बगदादी अमेरिका पर हमला करके सारी  दुनिया में इस्लामिक राज्य ले आएगा तो वो तो मरेंगे ही मगर उनके साथ साथ बड़े बेगुनाह भी मरेंगे.. शियों को जब ISIS मार रहा था.. बग़दाद से लेकर पाकिस्तान में जब रोज़ शियों को बम से उड़ाया जाता है तो सारी दुनिया के सुन्नी एकदम मौन रहते हैं.. मगर ये इसे कभी नहीं सोचते हैं कि अगर कोई शिया पॉवर में आ गया तो वो तो इनसे बदला लेगा ही कभी न कभी

जब थोड़ी नरम सरकार थी तब भारत में रोज़ बम विस्फ़ोट होते थे.. बिना वजह के.. बस ऐसे ही विस्फ़ोट किये जा रहे हैं ताकि इस्लामिक राज्य की कल्पना को साकार किया जाय.. अब जब सख्त हिन्दुत्ववादी सरकार आई है तो उसके संगठन तो दिखाएँगे ही अपनी ताक़त... और इसमें बेगुनाह मुस्लिम ही पिसेंगे.. और वो इसलिए पिसेंगे क्यूंकि ख़ुद को मॉडरेट कहने वाले मुसलमान अपने लोगों द्वारा किये गए ज़ुल्मों के ख़िलाफ़ तब मौन थे.. कैसे आपके घर में कोई आतंकी पैदा हो जाता है और आपको पता नहीं चलता? कैसे आपका लड़का जेहादी संगठनों के संपर्क में आ जाता है और आप जान नहीं पाते हैं? अब क्यूँ नहीं आपका लड़का आ रहा है जेहादियों के समर्थन में? एकदम से सब कैसे बंद हो गया आख़िर? किस तरह की आइडियोलॉजी आपने अपने बच्चे को दी थी शुरू से जो उन्हें शियों, अहमदियों और काफिरों से नफरत हुई? 

सुन्नी मुसलमान ये चाहता है की शिया सब मार डाले जाएँ, अहमदिया ख़त्म कर दिए आयें.. सूफ़ी मर जाएँ.. सारे नास्तिक मर जाएँ.. सारे क़ाफ़िर मर जाएँ.. क्यूंकि सब गुनाहगार हैं और सब शिर्क करने वाले लोग हैं.. ये मूल होता है इनकी सोच का.. और फिर इनके हिसाब से इनके संगठन काम करते हैं.. मगर जैसे ही कोई सवा सेर आता है इन्हें फ़ौरन इंसानियत याद आ जाती है.. और जब आप इन्हें समझाएं कि मामले की गहराई देखो तो ये आप पर गुस्सा हो जायेंगे.. ये बस ये चाहते हैं कि किसी भी तरह सारी दुनियां के लोग मिलकर सुन्नी मुसलमानो का मारा जाना रोक दें बस.. एकदम आफ़त मचा देंगे.. दिन रात मस्जिद में दुवाएं होने लगेगी.. छोटे बच्चे होते हैं जैसे, कि हाथ पैर पटक के रोने लगेंगे और ज़मीन पर लोट जायेंगे कि बस हमे ये खिलौना दो बस.. वही हाल है.. और इनको समझाओ कि जो कुछ भी हो रहा है वो तुम्हारे अपने लोगों द्वारा अपने धर्म द्वारा हो रहा है तो इन्हें दिखेगा नहीं.. ये बस हाथ पैर पटक के रोयेंगे कि बस किसी तरह से इसे बंद करवा दो बस.. बाबरी मस्जिद गिरने पर हाथ पैर पटक पटक के रोयेंगे, ख़ूब आफत मचाएंगे.. और बामियान में बुद्ध की मूर्ति को उड़ा दिया जाय तो चुपचाप चोकोलेट खाते हुवे मुस्कुरा कर देखते रहेंगे

शिया और अहमदिया भारत छोड़ के पाकिस्तान गए.. ये दोनों ये सोच कर गए पाकिस्तान कि अपने हम-मज़हब भाईयों के साथ रहेंगे आराम से.. इन्हें डर था कि भारत में हिन्दू अगर बहुसंख्यक हो गया यहाँ तो इन्हें मार डालेगा.. मगर हुवा उल्टा और पाकिस्तान में इनकी ये हालत हुई कि ये इनका वहां रहना दूभर हो गया.. जितने अभी अच्छे शिया और अहमदिया हैं सब कनाडा और दूसरी जगह बस गए.. जिन यहूदियों और इसाईयों को इन्होने पूरी उम्र दुश्मन समझा ये उन्हीं के साथ अब चैन से रह रहे हैं.. भारत का एक भी मुसलमान हिन्दुवों के डर से कहीं बाहर जा कर नहीं बसा.. और आधा पाकिस्तान लिबरल मुसलमानों से ख़ाली हो गया.. जो अपने भाईयों के पास गए थे भारत छोड़ के वही अब दरबदर हैं.. सीरिया में भी लोगों ने गुपचुप ISIS को खडा कर दिया.. इस उम्मीद से कि शिर्क करने वाले शिया और दूरे लोगों का साफाया कर देगा उनका बगदादी.. ख़लीफ़ा उसे चार लोगों ने तो मिलकर चुना नहीं.. गुपचुप अपार जन समर्थन था उसका 

इसलिए अब शिया पॉवर में आएगा तो आपको मारेगा.. वो आपसे चुन चुन के बदला लेगा.. क्यूंकि आप सदियों से उसे मार रहे हैं.. हिन्दू बदला लेगा क्यूंकि आपने उन्हें भी दुत्कारा है.. यहूदी भी लेगा क्यूंकि आप उसे भी अपना दुश्मन समझते हैं चौदह सौ साल से.. इसाई भी लेगा.. क्यूंकि आप ने उसे भी दुश्मन समझा है.. और इनमे से कोई भी आपका दुश्मन नहीं था आपने उसे दुश्मन बनाया है क्यूंकि आपने अपने धर्म और अपनी सोच को हमेशा से सब पर थोपने की कोशिश की है.. आपने ही ज़बरदस्ती ईसाईयों की बाइबिल और यहूदियों की तौरेत को जाली और नकली बता दिया और चौदह सौ साल से आप यही कर रहे हैं.. आप ने हर किसी की पूजा पद्धति को सिरे से खारिज कर के अपनी ही पूजा को क्ष्रेष्ठ बताया है और आप यहीं तक नहीं रुके बल्कि आपने सभी धर्मों और सभी पंथों से हमेशा नफ़रत की और आज भी करते हैं.. इस मानसिकता के साथ आप कैसे जियेंगे और लोगों के साथ भला?

आप कहेंगे कि सीरिया की घटना से इस सब का क्या लेना देना? और आप यहीं तो चूक जाते हैं.. एक अंधी नफ़रत है जो आपने पूरे विश्व में परोसी है अपने धर्म के नाम पर.. पचास से अधिक देश आपने अपनी इस्लामिक  आइडियोलॉजी पर खड़े किये और वहां से जितने भी सेक्युलर और अन्य धर्मों  लोग थे उन्हें या तो भागना पड़ा या फिर आपका धर्म स्वीकारना पड़ा.. और ये सब आपने प्यार मुहब्बत से नहीं किया.. और अभी भी आप वही कर रहे हैं.. औरों के बारे में क्या कहें आप अपने पंथों के अन्य लोगों को मार देते हैं जो आपके हिसाब से गुनाहगार होते हैं.. जहाँ आपका राज आता है  वहां आप साबरी क़व्वाल को मार देते हैं.. आप सूफ़ियों को मार देते हैं.. कोई तो हो जो चैन से जी पाए आपके बीच?

सीरिया आपकी अपनी पैदाईश है.. आप सब सुन्नी और वहाबियों ने इसे मिलकर पैदा किया है.. आपके अपने धर्म और उसकी आइडियोलॉजी का विकृत और घिनौना रूप है.. इसे गौर से देखिये जी भर के देखिये और रोते रहिये.. क्यूंकि जो मूल समस्या है आपकी नफ़रत की उसे तो आप कभी समझिएगा नहीं.. आपके जेहादी इस्लामिक संगठन कुछ दिनों बाद बग़दाद में विस्फ़ोट कर के फिर दो चार सौ शियाओं को मार डालेंगे तो बस आप सुकून पा जायेंगे.. ऐसे ही आपको हमेशा सुकून मिलता है और ऐसे ही मिलेगा.. तो थोड़ा इंतज़ार कर लीजिये

आप ये नहीं चाहते हैं कभी कि आपके इस्लामिक संगठन और आपकी इस्लामिक सरकारें शियों, अहमदियों, काफिरों, समलैंगिकों, नास्तिकों, मुशरिकों को न मारें.. उनका मारा जाना आपको भीतर से हमेशा सुकून देता आया है.. चौदह सौ सालों से.. और आप सिर्फ़ ये चाहते हैं कि बस आपके सुन्नी/वहाबी भाई कहीं न मारें.. ये मूल समस्या है और ये आपको कभी दिखती नहीं है.. गौर कीजियेगा इस समस्या पर कभी?


~ताबिश  




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